
अंडाल : अंडाल क्षेत्रान्तर्गत जामबाद के भू-धंसानग्रस्त भूभाग ने पुनः एक बार स्थानीय निवासियों में भयावह दहशत का संचार कर दिया है। रविवार को दो भिन्न स्थलों पर भू-धंसान की भयावह घटना का प्राकट्य हुआ, जिसके परिणामस्वरूप वहां गोफ के आकार में अत्यंत गहरे गड्ढे का निर्माण हो गया। यह घटना तब और अधिक विचारणीय हो जाती है, जब ज्ञात हो कि कुछ ही दिन पूर्व इसी स्थान, जामबाद मोड़ के निकट, इसी प्रकार की भू-धंसान की त्रासदी ने वहाँ के जनमानस को आशंकित कर दिया था। यद्यपि इस धंसान से किसी प्रकार की जनहानि या गंभीर क्षति नहीं हुई, तथापि इस संपूर्ण भू-परिसर के वासियों में निरंतर असुरक्षा का भाव व्याप्त है। वे अपनी जीवन-संपदा की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं और निरंतर भय के साये में जीवनयापन करने के लिए बाध्य हैं।
यह अत्यंत चिंताजनक है कि इस त्रासदी के कई घंटों उपरांत भी ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के किसी अधिकारी द्वारा घटनास्थल पर उपस्थित होकर स्थिति का अवलोकन नहीं किया गया। इस उदासीनता ने स्थानीय निवासियों के आक्रोश को और भी अधिक प्रज्वलित कर दिया है। स्थानीय जनों का कहना है कि कुछ समय पूर्व जामबाद मोड़ के समीप भी भू-धंसान हुआ था और ठीक उसी स्थान के निकटवर्ती भूभाग पर पुनः दो नए भू-धंसान के स्थल प्रकट हुए हैं। यह बात स्मरणीय है कि लगभग चार वर्ष पूर्व भी इसी क्षेत्र में भयावह भू-धंसान घटित हुआ था, जिसमें एक निर्दोष महिला जीवनमुक्ति को प्राप्त हुई थी, अर्थात उसकी अकस्मात मृत्युपरांत वह भूमिगत हो गई थी।
इस क्षेत्र के निवासी विगत अनेक वर्षों से जान जोखिम में डालकर इस असुरक्षित स्थल पर निवास करने को विवश हैं। किंतु आज तक उनके पुनर्वास हेतु किसी प्रकार की ठोस एवं प्रभावी व्यवस्था की गई हो, ऐसा प्रतीत नहीं होता। इस उपेक्षा एवं अनदेखी से व्यथित निवासियों ने इस गम्भीर समस्या को लेकर ईसीएल प्रशासन तथा शासन से अतिशीघ्र आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उनकी प्रमुख माँगों में पुनर्वास की समुचित व्यवस्था तथा निरंतर हो रहे भू-धंसान को रोकने हेतु कारगर कदम उठाने का आवाहन सम्मिलित है।
भू-धंसान की इस घटनाक्रम ने यहाँ के निवासियों को जीवन एवं संपदा दोनों ही दृष्टियों से असुरक्षित कर दिया है और स्थिति की विकटता को देखते हुए शीघ्रातिशीघ्र निवारणात्मक उपायों की अत्यंत आवश्यकता है।















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