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जामुड़िया में पाइपलाइन बिछाने को लेकर ग्रामीणों का विरोध, पुलिस ने किया हल्का बल प्रयोग

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ghanty

जामुड़िया :  जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र के हिजलगोड़ा पंचायत के पाथरचुर गांव में पाइपलाइन बिछाने का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर से ग्रामीणों ने इस परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस को स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव से होकर तीन पाइपलाइनों का विस्तार किया जा रहा है, जिनमें से दो पाइपलाइनों का संबंध सरकारी योजनाओं से है, जो गांव के लिए हैं। लेकिन तीसरी पाइपलाइन का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पाइपलाइन किसी फैक्ट्री को पानी आपूर्ति करने के लिए बिछाई जा रही है, और इस मामले में उन्हें कोई आश्वासन नहीं मिला है कि इससे गांव को क्या लाभ होगा।

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स्थानीय निवासी संध्या बाऊरी ने बताया कि गांववाले सरकारी योजनाओं के तहत पाइपलाइन का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन तीसरी पाइपलाइन को लेकर उनके मन में संदेह है। उनका कहना था कि यदि यह पाइपलाइन गांव के लिए है, तो इसके बदले ग्रामीणों को रोजगार के अवसर और पर्याप्त जल आपूर्ति मिलनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पाइपलाइन बिछाने के कारण गांव की सड़कें खस्ताहाल हो गई हैं, और इसके परिणामस्वरूप गांववासियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं, पीएचई विभाग के जूनियर इंजीनियर सोमेन कुंडू ने इस विरोध को गलतफहमी बताया। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत पाथरचुर ग्राम से अजय नदी तक पाइपलाइन बिछाई जा रही है। तीसरी पाइपलाइन पुनर्वास योजना का हिस्सा है, जो पानी आपूर्ति के लिए फैक्ट्री तक पहुंचाई जाएगी। उनके अनुसार, ग्रामीणों को इस संदर्भ में गलत जानकारी दी जा रही है।

ग्रामीणों की मांग है कि यदि पाइपलाइन उनके गांव से होकर गुजर रही है, तो उन्हें इसके बदले रोजगार और विकास के अवसर प्राप्त होने चाहिए। साथ ही, पाइपलाइन के काम के दौरान क्षतिग्रस्त हो रही सड़कों की मरम्मत भी प्राथमिकता से की जानी चाहिए।

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स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने मौके पर बीडीओ आरुनालोक घोष, एसीपी सेंट्रल विमान कुमार मिर्धा, अन्य पुलिस अधिकारियों और पीएचई विभाग के अधिकारियों को तैनात किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाकर पाइपलाइन के कार्य को पुनः शुरू करवा दिया। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया कि इस संबंध में ग्रामीणों से संवाद कायम किया जाएगा और उनकी समस्याओं का समाधान शीघ्र किया जाएगा।

यह घटना इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं को लागू करते समय यदि स्थानीय लोगों को विश्वास में नहीं लिया जाता, तो विरोध और विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।

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