
आसनसोल : कल्चरल एंड लिटरेरी फोरम ऑफ़ बंगाल द्वारा आज आसनसोल के काली पहाड़ी स्थित मां घागर बुड़ी मंदिर प्रांगण में एक सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम त्योहारों के मौसम के समाप्ति के पश्चात, क्षेत्रीय संस्कृति और साहित्य के प्रति आस्था और समर्पण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आसनसोल और इसके आस-पास के क्षेत्रों के साथ-साथ कोलकाता से भी कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों और गायकों ने भाग लिया और अपनी प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर कई कवियों और गायकों ने अपनी रचनाएँ और गीत प्रस्तुत किए, जिनमें साहित्य, संगीत और संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में साहित्य और कला के प्रेमियों की एक बड़ी संख्या ने भाग लिया, जिन्होंने विभिन्न प्रस्तुतियों का आनंद लिया और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने के इस प्रयास को सराहा।
कार्यक्रम के आयोजक और कल्चरल एंड लिटरेरी फोरम ऑफ़ बंगाल के सदस्य प्रीतम दास ने इस आयोजन के उद्देश्य और महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह आयोजन हर साल त्योहारों के मौसम के बाद किया जाता है, ताकि लोग त्योहारी उत्सवों के बाद भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सकें और साहित्य तथा कला की एक नई दिशा की ओर अग्रसर हो सकें। उनका कहना था कि इस प्रकार के आयोजन न केवल सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक होते हैं, बल्कि यह क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर एक समृद्ध साहित्यिक वातावरण को भी जन्म देते हैं।

प्रीतम दास ने यह भी बताया कि इस आयोजन का नाम “बैठकी अड्डा” रखा गया है, जो एक पारंपरिक बंगाली आदत को दर्शाता है, जिसमें साहित्यकार, कवि और संगीतकार एकत्रित होकर अपनी रचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। इस प्रकार के कार्यक्रमों का उद्देश्य न केवल कला और साहित्य के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि नए और युवा साहित्यकारों को अपनी कला प्रस्तुत करने का एक मंच मिले।
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्य प्रेमियों और कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय पहलुओं को उजागर किया। कविता, गीत और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों ने एक अद्भुत माहौल रचा, जिसने सभी उपस्थितों को समृद्ध और सकारात्मक अनुभव प्रदान किया।
इस आयोजन के माध्यम से कलीन और सांस्कृतिक परिवेश में एक नया उत्साह उत्पन्न हुआ और यह उम्मीद जताई गई कि भविष्य में इस प्रकार के और भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो क्षेत्रीय कला और साहित्य को प्रोत्साहित करें।















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