
आसनसोल : कई बार स्थगन के बाद, मंगलवार को आखिरकार आसनसोल स्थित विशेष सीबीआई अदालत में बहुचर्चित कोयला तस्करी मामले में आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी हुई। मुख्य आरोपी अनुप मांझी उर्फ लाला, जयदेव मंडल सहित 49 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए गए।
विशेष सीबीआई अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, यह मामला 2015 से 2020 के बीच 31 लाख मीट्रिक टन कोयले की चोरी और तस्करी का है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 1340 करोड़ रुपये है। इस मामले में 46 अभियुक्त अदालत में स्वयं उपस्थित हुए, जबकि विकाश मिश्रा ने कोलकाता के प्रेसिडेंसी जेल से वर्चुअल माध्यम से पेशी दी।

अन्य अभियुक्तों में, नरेश साहा और तनमय दास, दोनों ने स्वास्थ्य कारणों से वर्चुअल माध्यम से अदालत की कार्यवाही में भाग लिया। अभियोजन पक्ष ने प्रस्तुत किया कि इस व्यापक तस्करी कांड ने न केवल खनिज संपदा को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी गंभीर चोट दी है।
विशेष सीबीआई न्यायाधीश राजेश चक्रवर्ती ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद, मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2025 को निर्धारित की। न्यायाधीश ने यह भी निर्देश दिया कि उस दिन से मुकदमे की कार्यवाही औपचारिक रूप से आरंभ होगी। प्रारंभिक सुनवाई के लिए सीबीआई ने दो प्रमुख गवाहों को अदालत में उपस्थित रहने का आदेश दिया है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस तस्करी कांड का मुख्य कर्ताधर्ता अनुप मांझी उर्फ लाला है, जो पश्चिम बंगाल और झारखंड के कोयला क्षेत्रों में एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से तस्करी का संचालन करता था। अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर, आरोप लगाया गया कि स्थानीय स्तर पर अधिकारी, राजनेता और तस्करी नेटवर्क के सदस्य इस घोटाले में शामिल थे।
विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल होने के बाद, सीबीआई ने इस मामले में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और तस्करी के हर पहलू की गहन जांच का आश्वासन दिया। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई में और कोई देरी नहीं होगी और न्याय की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।
कोयला तस्करी मामला पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा आर्थिक अपराधों में से एक माना जा रहा है, और इसका राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव दूरगामी है। इस पर विशेष निगाहें बनी हुई हैं कि न्यायालय कैसे इस घोटाले से संबंधित आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करता है।















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