
आसनसोल : आसनसोल नगर निगम के बैंक खाते से अचानक 40 लाख रुपये की रहस्यमय ढंग से गायब होने की घटना ने नगर निगम और पुलिस प्रशासन में भारी उथल-पुथल मचा दी है। इस मामले ने न केवल नगर निगम के अधिकारियों को चिंता में डाल दिया है, बल्कि सरकारी कोष की सुरक्षा और लेखा प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस संदर्भ में, आसनसोल नगर निगम के मेयर बिधान उपाध्याय ने नगर निगम के वित्त अधिकारी (एफओ) को तत्काल पुलिस में इस घोटाले के संबंध में शिकायत दर्ज कराने का निर्देश दिया। इसके अनुरूप, आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस के साइबर सेल में इस धोखाधड़ी के मामले को लेकर लिखित शिकायत दर्ज की गई है। मेयर उपाध्याय के अनुसार, प्राथमिक जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि उक्त राशि जबलपुर, मध्य प्रदेश स्थित एक बैंक खाते में स्थानांतरित की गई है, जो पुलिस के लिए भी चौंकाने वाला है।
सूत्रों के अनुसार, इस गबन का तरीका अत्यंत जटिल प्रतीत होता है। बैंक से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि पहले नगर निगम की ओर से एक बैंक शाखा को एक चेक सौंपा गया था, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था। रद्द किए गए चेक को नियमानुसार नगर निगम कार्यालय में जमा भी कर दिया गया था। बावजूद इसके, 40 लाख रुपये की यह भारी-भरकम राशि नगर निगम के बैंक खाते से निकाल ली गई, जो एक गहन जांच का विषय बन गया है।

इस घटना पर मेयर बिधान उपाध्याय का स्पष्ट कहना है कि यह सीधी-सीधी धोखाधड़ी का मामला है। उन्होंने इस गंभीर धोखाधड़ी के पर्दाफाश हेतु पूरी जांच करवाने की बात कही है। दूसरी ओर, आसनसोल नगर निगम के कांग्रेस पार्षद गुलाम सरबर ने इस घटना को लेकर एक और गहरी शिकायत सामने रखी है। उन्होंने नगर निगम की बोर्ड बैठक में यह मामला बार-बार उठाया है कि 2021 में कुल्टी बोरो कार्यालय से 87 लाख रुपये की भारी राशि गायब हो चुकी है। उनका आरोप है कि वित्त विभाग के कर्मचारियों द्वारा यह धनराशि बैंक खाते में जमा नहीं की गई थी। इसके संदर्भ में तीन जनवरी 2021 को कुल्टी थाने में सामान्य डायरी (जीडी) दर्ज कराई गई थी, लेकिन उसके बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी और आज तक उस धनराशि का कोई सुराग नहीं मिला है।
पार्षद गुलाम सरबर ने इस पूरी घटना को नगर निगम प्रशासन की लापरवाही और वित्तीय भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए कहा कि 87 लाख रुपये की चोरी के तीन वर्षों के बाद आज एक बार फिर नगर निगम के खाते से 40 लाख रुपये गायब होने की घटना सामने आई है। उन्होंने प्रशासन से सख्त जांच की मांग की है और दोषियों को शीघ्र कानून के शिकंजे में लाने का आह्वान किया है।
उधर, पुलिस सूत्रों का कहना है कि घटना की जांच आरंभ कर दी गई है और आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस की साइबर सेल भी इसमें सक्रिय रूप से शामिल हो गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक जांच के दौरान अनेक गड़बड़ियों के संकेत मिल रहे हैं और यह मामला साइबर धोखाधड़ी का प्रतीत हो रहा है। आसनसोल नगर निगम के अधिकारियों और बैंक की संलिप्तता की भी जांच की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की आंतरिक गड़बड़ी का पर्दाफाश किया जा सके।
यह घटना नगर निगम के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि किस प्रकार से आधुनिक तकनीक और साइबर धोखाधड़ी से सरकारी कोष पर संकट उत्पन्न हो सकता है। भविष्य में ऐसे कदाचार से बचने के लिए कड़े प्रशासनिक उपाय और वित्तीय निगरानी की आवश्यकता स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है।















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