
आसनसोल : तिराट अंचल में रश्मि ग्रुप द्वारा ओसीपी (ओपन कास्ट प्रोजेक्ट) निर्माण की योजना को लेकर स्थानीय निवासियों में आक्रोश व्याप्त हो गया है। चेलोद कुमारडीहा तिराट अंचल सुरक्षा समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने रश्मि ग्रुप के कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीण धरने पर बैठकर स्पष्ट रूप से यह मांग कर रहे थे कि उनके क्षेत्र में ओसीपी का निर्माण किसी भी स्थिति में नहीं होने दिया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि नारायण कुड़ी में पहले से ही ओसीपी निर्माण के कारण वहां के निवासियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा है। वे नहीं चाहते कि तिराट अंचल भी उसी तरह की परेशानियों का शिकार बने। प्रदर्शन के दौरान कंपनी के अधिकारियों और स्थानीय निवासियों के बीच तीखी बहस भी हुई।

रश्मि ग्रुप के सीनियर मैनेजर संदीप चौधरी ने बताया कि कुछ स्थानीय लोग अपनी मांगों और शंकाओं को लेकर विरोध जता रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण यह जानना चाहते थे कि ओसीपी निर्माण से उन्हें क्या लाभ होगा और क्या समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। कंपनी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी चिंताओं और मांगों को प्रबंधन के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। जल्द ही ग्रामीणों को इस संबंध में स्पष्ट जवाब दिया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि रश्मि ग्रुप गांव वालों को अंधेरे में रखकर ओसीपी निर्माण का कार्य कर रहा है। इस पर संदीप चौधरी ने कहा कि यह आरोप निराधार है। उन्होंने बताया कि ओसीपी परियोजना को लेकर शुरुआत से ही ग्रामीणों के साथ संवाद किया जा रहा है। एक महीने पहले भी ग्रामीणों ने इसी विषय पर ज्ञापन सौंपा था। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि प्रबंधन केवल चुनिंदा लोगों से बातचीत कर रहा है। इस पर चौधरी ने कहा कि जब भी ग्रामीणों से चर्चा हुई है, पूरे गांव के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। प्रबंधन पर लगाए गए ऐसे आरोप पूरी तरह से गलत हैं।

संदीप चौधरी ने स्पष्ट किया कि ओसीपी निर्माण का अंतिम निर्णय कोल इंडिया के हाथ में है और इसमें स्थानीय प्रबंधन की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित ओसीपी गांव के बाहर स्थापित होगा, जिससे ग्रामीणों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।
ग्रामीणों ने एंबुलेंस और मेडिकल कैंप की व्यवस्था की मांग की है। इस पर चौधरी ने कहा कि प्रबंधन इन मांगों को गंभीरता से ले रहा है और उनकी पूर्ति के लिए कदम उठाए जाएंगे।ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच इस विरोध से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि प्रबंधन ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान कैसे करता है।















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