
आसनसोल : पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा वर्ष 2024 में आलू निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध से राज्य के आलू उत्पादकों को गंभीर आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। वरिष्ठ व्यवसायी सुरेन जलान ने सोशल मीडिया पर इस नीति की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य सरकार के इस निर्णय के कारण 2025 में बंगाल के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

जलान के अनुसार, सरकार द्वारा आलू को राज्य से बाहर भेजने पर प्रतिबंध लगाए जाने से उत्पादकों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। जहां उत्तर प्रदेश में किसानों को आलू का मूल्य ₹15 प्रति किलोग्राम प्राप्त हो रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल में यह दर घटकर मात्र ₹10 प्रति किलोग्राम रह गई है, जो उत्पादन लागत से भी कम है।

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इस नीति के चलते झारखंड, बिहार, असम, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश के व्यापारी अब बंगाल के कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने से परहेज कर रहे हैं। इससे कोल्ड स्टोरेज उद्योग भी संकट में आ सकता है और किसानों की कठिनाइयां बढ़ सकती हैं।

जलान ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह दूरगामी दृष्टिकोण अपनाते हुए किसानों, व्यापारियों और कोल्ड स्टोरेज संचालकों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय ले। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र समुचित नीति नहीं अपनाई, तो राज्य में कृषि और औद्योगिक क्षेत्र के विकास पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।















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