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पश्चिम बंगाल में हर जिले में स्थायी हस्तशिल्प मेला, कारीगरों को मिलेगा बड़ा मंच

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आसनसोल :  पश्चिम बंगाल सरकार ने स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के प्रत्येक जिले में स्थायी हस्तशिल्प मेला स्थापित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे कारीगरों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए एक स्थायी मंच मिल सके। इस योजना की घोषणा राज्य के श्रम मंत्री मलय घटक ने आसनसोल में आयोजित हस्तशिल्प मेले के उद्घाटन समारोह के दौरान की।

कारीगरों की आजीविका को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहल पर यह योजना लागू की जा रही है, जिसके तहत प्रत्येक जिले में एक निश्चित स्थान निर्धारित किया जाएगा, जहां कारीगर अपने हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित और बेच सकेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल स्थानीय कारीगरों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है, बल्कि पारंपरिक हस्तशिल्प और लोककला को भी संरक्षित करना है।

मंत्री मलय घटक ने बताया कि इस योजना का पहला स्थायी स्थल आसनसोल में स्थापित किया जाएगा। यहां स्थानीय कारीगरों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे वे अपने उत्पादों को उचित मूल्य पर बेच सकें। इसके बाद धीरे-धीरे इस योजना को राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।

स्थायी बाजार से मिलेगा व्यापक मंच

राज्य सरकार का मानना है कि अस्थायी मेलों की तुलना में स्थायी हस्तशिल्प मेले कारीगरों को अधिक लाभ पहुंचाएंगे। आमतौर पर हस्तशिल्प और कारीगरी से जुड़े लोग अपने उत्पादों को बेचने के लिए विभिन्न मेलों या बाजारों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन इस पहल से उन्हें एक स्थायी स्थान मिलेगा, जहां वे पूरे साल अपने उत्पादों की बिक्री कर सकेंगे।

सरकार ने बताया कि इस योजना के तहत बांस के उत्पाद, टेराकोटा, जूट के सामान, कांथा सिलाई, मूर्तिकला, पटुआ चित्रकला, लकड़ी पर नक्काशी और अन्य पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया जाएगा।

स्थानीय कलाकारों के लिए रोजगार के नए अवसर

इस पहल के जरिए कारीगरों और हस्तशिल्प कलाकारों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इससे वे अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और उन्हें उनके श्रम का पूरा लाभ मिलेगा।

इस मौके पर मलय घटक ने कहा, “मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कारीगरों के हित में हमेशा संवेदनशील रही हैं। इस पहल से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा और उनकी कला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।”

राज्य सरकार की इस योजना से हस्तशिल्प उद्योग को नई ऊंचाइयां मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि यह पहल कारीगरों की आजीविका और राज्य की अर्थव्यवस्था पर कितना सकारात्मक प्रभाव डालती है।

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