
आसनसोल : पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की पुनर्बहाली की मांग को लेकर चित्तरंजन रेलवे मेंस कांग्रेस (CRMC) के तत्वावधान में रेलवे कर्मचारियों ने एक दिवसीय धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) एवं एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को तत्काल निरस्त कर ओपीएस को पुनः लागू करने की मांग उठाई।

राष्ट्रीय फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे (NFIR) के आह्वान पर अखिल भारतीय विरोध सप्ताह के तहत इस आंदोलन को संगठित किया गया। इसके तहत राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें सरकार से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का आह्वान किया गया।

कर्मचारियों की नाराजगी और आंदोलन की चेतावनी
चित्तरंजन रेलवे मेंस कांग्रेस के महासचिव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि 2004 में लागू की गई नई पेंशन योजना (NPS) कर्मचारियों के अधिकारों का हनन करती है। सरकार से लंबे संघर्ष के बाद कर्मचारियों को ओपीएस बहाली की आशा थी, लेकिन सरकार ने इसे बहाल करने के बजाय एकीकृत पेंशन योजना (UPS) लागू कर दी, जो कि अनेक विसंगतियों से भरी हुई है। उन्होंने सरकार को आगाह किया कि यदि शीघ्र मांगें नहीं मानी गईं तो संघर्ष को और तीव्र किया जाएगा।
यूपीएस की खामियां और कर्मचारियों की मांगें: 1. पेंशन का अपमानजनक रूपांतरण: ‘पेंशन’ शब्द को ‘पे-आउट’ में परिवर्तित कर दिया गया, जिससे कर्मचारियों की सेवा का सम्मान घटा है। 2. योगदान आधारित पेंशन: ओपीएस में सरकारी योगदान होता था, जबकि यूपीएस में कर्मचारियों से अनिवार्य योगदान लिया जा रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। 3. घटिया भुगतान प्रणाली: यूपीएस के अंतर्गत सुपरएन्यूएशन पर अंतिम वेतन का केवल 50% दिया जाता है, जबकि ओपीएस में अंतिम वेतन के आधार पर पूर्ण पेंशन मिलती थी। 4. सेवा अवधि की कठोर शर्तें: ओपीएस में 20 वर्षों की सेवा के बाद पेंशन का अधिकार था, जबकि यूपीएस में इसे 25 वर्ष कर दिया गया है। 5. योग्यता अवधि के अनुसार पेंशन में कटौती: यदि कर्मचारी 25 वर्ष से कम सेवा करते हैं, तो उन्हें अनुपातिक कटौती के साथ पेंशन दी जाएगी, जिससे कई वरिष्ठ कर्मचारियों को भारी नुकसान होगा। 6. न्यूनतम पेंशन की अनिश्चितता: यूपीएस में 10 वर्षों की सेवा के बाद ही न्यूनतम ₹10,000 मासिक पेंशन देने की बात कही गई है, जो कई कर्मचारियों को पेंशन से वंचित कर सकता है। 7. स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर असुरक्षा: 25 वर्षों की सेवा पूरी करने के बाद ही कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले सकते हैं, जबकि ओपीएस में 20 वर्षों के बाद भी यह सुविधा थी। 8. पारिवारिक पेंशन में कटौती:पेंशन धारक की मृत्यु के बाद केवल 60% राशि जीवनसाथी को मिलेगी, अन्य आश्रितों के लिए कोई प्रावधान नहीं है। 9. भविष्य निधि पर नियंत्रण: यूपीएस के तहत नियोक्ता कर्मचारियों के मासिक वेतन का 10% अनिवार्य रूप से रोक सकता है, जिससे कर्मचारियों की वित्तीय स्वतंत्रता बाधित होगी। 10. 80 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए कोई अतिरिक्त लाभ नहीं। ओपीएस के तहत 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगियों को अतिरिक्त पेंशन मिलती थी, लेकिन यूपीएस में यह प्रावधान हटा दिया गया है।11. पेंशन समायोजन की कोई सुविधा नहीं। यूपीएस में पेंशन के समायोजन (Commutation) की कोई सुविधा नहीं है, जिससे कर्मचारियों को एकमुश्त राशि प्राप्त करने का लाभ समाप्त हो गया है।12. अन्य सभी पेंशन सुविधाओं का हनन
ओपीएस के अंतर्गत मिलने वाली परिजनों के लिए अनुकंपा पेंशन, विकलांगता पेंशन, अंशदायी पेंशन और विशेष पेंशन योजनाओं को समाप्त कर दिया गया है।

संघर्ष की अगली रणनीति
रेलवे कर्मचारियों ने सरकार को आगाह किया कि यदि शीघ्र ओपीएस बहाल नहीं की गई तो देशव्यापी उग्र आंदोलन होगा। इस धरना प्रदर्शन में सैकड़ों रेलवे कर्मचारियों ने भाग लिया और सरकार से एनपीएस और यूपीएस को तुरंत समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की।















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