
आसनसोल : भाजपा नेता और पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी ने अपने एक्स हैंडल पर एक चिंताजनक ट्वीट के माध्यम से पश्चिम बंगाल में हिंदी भाषियों के प्रति बढ़ते भाषाई द्वेष पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुःखद है कि कुछ संगठन पश्चिम बंगाल में हिंदी बोलने वालों के लिए ‘बीमारू’ जैसे अपमानजनक शब्द का उपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये संगठन पवित्र छठ पूजा जैसे महोत्सव को ‘बीमारुओं’ का पर्व बताकर समाज में भाषाई घृणा को बढ़ावा दे रहे हैं।
जितेंद्र तिवारी ने अपनी ट्वीट में उल्लेख किया कि छठ पूजा, जो कि विशेष रूप से हिंदी भाषी समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व है, को इस प्रकार से संदर्भित करना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव को भी प्रभावित करता है। उनका कहना है कि इस प्रकार की हरकतें न केवल एक समुदाय को अपमानित करती हैं, बल्कि समाज में नफरत और भेदभाव की भावना को भी बढ़ावा देती हैं।
उन्होंने पश्चिम बंगाल के गृह विभाग और पुलिस प्रशासन से आग्रह किया कि इस मामले की गंभीरता को समझते हुए उचित कदम उठाए जाएं। तिवारी ने कहा कि @HomeBengal DG और @WBPolice को इस मुद्दे की जांच करनी चाहिए और न्याय के लिए कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। उनका मानना है कि प्रशासन को इस प्रकार के भड़काऊ बयानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि समाज में सामंजस्य और भाईचारे की भावना को बढ़ावा दिया जा सके।

जितेंद्र तिवारी के इस ट्वीट ने क्षेत्र में एक नई बहस को जन्म दिया है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कई लोगों ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा कि भाषाई भेदभाव को समाप्त करने की आवश्यकता है, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक अभियान के रूप में देखा है।

बातचीत का यह सिलसिला केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है। भारतीय समाज की विविधता और बहुसांस्कृतिकता के संदर्भ में इस प्रकार के मुद्दों का समाधान आवश्यक है, ताकि सभी समुदायों के बीच एकजुटता और सहयोग का भाव बना रहे। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हिंदी भाषियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक ठोस रणनीति की आवश्यकता है, और राजनीतिक नेतृत्व को इस दिशा में गंभीरता से सोचना होगा।















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