
बर्नपुर : भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) में बोनस वितरण को लेकर प्रबंधन एवं विभिन्न श्रमिक संगठनों के मध्य तनातनी चरम पर है। मंगलवार को बर्नपुर स्थित स्कोब गेट पर आयोजित बैठक के दौरान भी दोनों पक्षों के मध्य कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई। यूनियनों का दृढ़तापूर्वक कहना है कि जब तक ₹42,500 के बोनस की मांग को पूर्णतः स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक किसी प्रकार का समझौता संभव नहीं है। इस कारण, आगामी 28 अक्टूबर को निर्धारित हड़ताल को अपरिहार्य मानते हुए पांचों प्रमुख यूनियनों ने अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर लिया है।

बैठक के दौरान, प्रबंधन पक्ष की ओर से श्री यूपी सिंह एवं सुश्री सुष्मिता ने प्रतिनिधित्व किया। दूसरी ओर, श्रमिक संगठनों की ओर से भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के नेता हरजीत सिंह, ठेकेदार मजदूर कांग्रेस के अध्यक्ष बिजय सिंह, भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) से संजीत बनर्जी एवं अजय सिंह, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) से सौरेन चट्टोपाध्याय, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) से उत्पल सिन्हा एवं हिंद मजदूर सभा (एचएमएस) से मुमताज अहमद शामिल हुए।

इंटक के नेता हरजीत सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 28 अक्टूबर को प्रस्तावित हड़ताल, जिसमें इंटक, बीएमएस, सीटू, एटक एवं एचएमएस का संयुक्त आह्वान है, को अब टाला नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रबंधन द्वारा आयोजित बैठक में, प्रबंधन ने संयंत्र के संचालन हेतु कुछ कर्मचारियों को ‘इमरजेंसी पास’ प्रदान करने का प्रस्ताव रखा था, परंतु यूनियनों ने इसे सिरे से नकार दिया।
यूनियनों ने स्पष्ट किया कि जब तक बोनस के मुद्दे का संपूर्ण समाधान नहीं होता, तब तक किसी भी अन्य प्रकार की शर्तों या वार्ताओं को स्वीकार करना उनके लिए असंभव है। श्रमिक संगठनों का यह भी मानना है कि प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों को बोनस प्रदान करने के प्रश्न पर विलंब एवं आनाकानी की नीति अपनाई जा रही है, जिसे किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, आगामी बुधवार को आसनसोल में सहायक श्रमायुक्त (एएलसी) द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रबंधन एवं यूनियन प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त, दिल्ली में भी केंद्रीय श्रमायुक्त द्वारा केंद्रीय यूनियनों एवं सेल प्रबंधन के मध्य एक और बैठक बुलाई गई है, जिसका उद्देश्य हड़ताल को टालने एवं विवाद को सुलझाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग ढूँढना है। ज्ञात हो कि श्रमायुक्त द्वारा सेल प्रबंधन को जारी किए गए शो-कॉज़ नोटिस का उत्तर प्रबंधन ने दो दिनों के भीतर ही प्रदान कर दिया था, जिसके आधार पर बैठक 25 अक्टूबर को रखी गई है।

श्रम संगठनों के नेताओं का कहना है कि यदि प्रबंधन उचित एवं सकारात्मक समाधान लेकर वार्ता में नहीं आता, तो 28 अक्टूबर की हड़ताल अपरिहार्य हो जाएगी। वर्तमान परिस्थिति में, श्रमिक संगठनों ने अपनी तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ कर लिया है, ताकि हड़ताल के दौरान कोई भी अव्यवस्था उत्पन्न न हो और श्रमिकों की एकजुटता में कोई कमी न आने पाए।















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