
बर्नपुर, : 28 अक्टूबर को सेल के श्रमिकों द्वारा उठाए गए बकाया एरियर और सम्मानजनक बोनस की मांग को लेकर की गई हड़ताल को लेकर नया मोड़ आ गया है। इस हड़ताल के परिणामस्वरूप प्रबंधन द्वारा 25 श्रमिकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई, जिसके खिलाफ आज भारतीय मजदूर संघ कार्यालय में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया।

सम्मेलन में विभिन्न श्रमिक संगठनों के नेताओं ने अपनी बात रखी और कहा कि मजदूर कभी भी हड़ताल नहीं करना चाहते, यह उनके लिए आखिरी विकल्प होता है। वे तब हड़ताल करने पर मजबूर होते हैं, जब प्रबंधन उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज करता है। नेताओं ने यह भी कहा कि हड़ताल के दौरान माहौल में थोड़ी बहुत उत्तेजना जरूर थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ था जिससे कि प्रबंधन को कार्रवाई करने की आवश्यकता पड़ती।

श्रमिक संगठनों के नेताओं ने स्पष्ट रूप से यह बयान दिया कि हड़ताल के दौरान किसी भी कर्मचारी या अधिकारी के साथ न तो मारपीट की गई और न ही किसी भी कर्मचारी के काम में दखलंदाजी की गई। इसके बावजूद, प्रबंधन ने 25 श्रमिकों के खिलाफ कार्रवाई की, जिसे संगठनों ने गलत बताया।
भारतीय मजदूर संघ के एक नेता ने कहा, “अगर प्रबंधन यह समझता है कि वह श्रमिकों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई करके उनकी एकता को तोड़ सकता है, तो यह उसकी बड़ी भूल होगी। मजदूरों की एकता को इस प्रकार से कमजोर नहीं किया जा सकता।”
संगठनों ने यह भी कहा कि हड़ताल का उद्देश्य सिर्फ श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना था, और हड़ताल के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या गड़बड़ी नहीं हुई थी। उनका कहना था कि प्रबंधन द्वारा की गई कार्रवाई श्रमिकों के साथ अन्याय है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
समिति के सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान प्रबंध तंत्र ‘हिटलरशाही’ के तरीके अपनाकर श्रमिकों को भयभीत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे कदमों से श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। नेताओं ने कहा कि यदि प्रबंधन इसी तरह से श्रमिकों की आवाज दबाने का प्रयास करता रहा, तो आने वाले दिनों में और भी संघर्ष उत्पन्न हो सकता है।
अंत में, श्रमिक संगठनों ने यह कहा कि वे इस मामले को लेकर किसी भी क़ीमत पर चुप नहीं बैठेंगे और हर संभव कानूनी कदम उठाएंगे। उनके संघर्ष का उद्देश्य सिर्फ श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना है, और वे अपने अधिकारों को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे।
संगठनों के नेताओं ने श्रमिकों से एकजुट रहने की अपील की और कहा कि इस तरह की कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।















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