
आसनसोल : सातग्राम क्षेत्र के महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष मंगलवार को सीएमएसआई सीटू के बैनर तले श्रमिकों ने विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के अध्यक्ष जी.के. श्रीवास्तव ने प्रबंधन पर श्रमिकों की उपेक्षा और खदानों के निजीकरण की साजिश का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रबंधन श्रमिकों की समस्याओं पर ध्यान देने में विफल रहा है।
श्रीवास्तव ने बताया कि लंबे समय से जेसीसी (संयुक्त परामर्शदात्री समिति) की बैठक आयोजित नहीं की गई है। इसके चलते श्रमिक अपनी समस्याओं को प्रबंधन के समक्ष रखने से वंचित रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति श्रमिक हितों के प्रति प्रबंधन की उदासीनता को दर्शाती है।

संगठन ने खदानों में श्रमिकों की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि प्रबंधन जानबूझकर श्रमिकों की नियुक्ति रोक रहा है। श्रीवास्तव ने कहा कि यह खदानों के निजीकरण की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन इन नीतियों पर पुनर्विचार नहीं करता, तो संगठन संघर्ष तेज करेगा।
श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के नाम पर कोलियरी में रिश्वतखोरी का आरोप लगाते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि प्रबंधन के कुछ अधिकारी समस्याओं का समाधान करने के लिए श्रमिकों से अवैध धन की मांग करते हैं। उन्होंने इसे श्रमिक हितों के साथ अन्याय करार दिया।

प्रदर्शन के दौरान महाप्रबंधक और व्यक्तिगत प्रबंधक की अनुपस्थिति पर रोष व्यक्त करते हुए श्रीवास्तव ने कहा, “यह दुखद है कि जब हम अपनी समस्याओं को लेकर यहां पहुंचे, तो शीर्ष प्रबंधन के दोनों प्रमुख अधिकारी कार्यालय में मौजूद नहीं थे। इस तरह समस्याओं से भागने से उनका समाधान नहीं होगा।” उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान केवल मिल-बैठकर बातचीत से संभव है। यदि प्रबंधन श्रमिकों की आवाज को अनसुना करता रहा, तो श्रमिकों का आक्रोश और बढ़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो संगठन बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएगा। यह प्रदर्शन श्रमिकों की समस्याओं को उजागर करने के साथ प्रबंधन को चेताने के उद्देश्य से किया गया, ताकि जल्द ही श्रमिक हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।















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