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ठेका कंपनी द्वारा बाहरी श्रमिकों की भर्ती पर स्थानीयों का आक्रोश, कोयला खदान का काम ठप

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कुल्टी :- आसनसोल के कुल्टी विधानसभा क्षेत्र में स्थित बीसीसीएल की दामागोरिया ओपन कास्ट प्रोजेक्ट कोयला खदान में सोमवार को स्थानीय निवासियों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया और कामकाज ठप करवा दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ठेका कंपनी बाहरी श्रमिकों को भर्ती कर रही है, जबकि स्थानीय लोगों को रोजगार से वंचित रखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस खदान में पहले भी कार्यरत रह चुके हैं और उनका अनुभव खदान के संचालन में सहायक सिद्ध हो सकता है। इसके बावजूद नई ठेका कंपनी उनकी उपेक्षा कर बाहरी लोगों को काम पर रख रही है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, ओसीपी खदान का कार्य लंबे समय से बंद था। जब ठेका कंपनी को कोयला खनन का ठेका मिला और खदान का पुन: संचालन शुरू हुआ, तो उम्मीद थी कि स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाएगा। लेकिन कंपनी ने स्थानीयों की अपेक्षाओं को नजरअंदाज करते हुए बाहरी श्रमिकों को प्राथमिकता दी, जिससे आक्रोशित ग्रामीणों ने कोयला खदान का काम ठप कर दिया।

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि खदान संचालन में प्राथमिकता स्थानीय श्रमिकों को दी जाए। विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने स्पष्ट किया कि जिन स्थानीय श्रमिकों के पास पूर्व खनन अनुभव है, उन्हें इस प्रोजेक्ट में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके अलावा, खदान संचालन पूरी क्षमता से चालू होने पर अतिरिक्त रोजगार के अवसर भी स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित रखे जाएं।

दामागोरिया ओपन कास्ट प्रोजेक्ट के प्रभारी अधिकारी देबाशीष चक्रवर्ती ने बताया कि आरए माइनिंग को कोयला खनन का ठेका प्राप्त हुआ है और परियोजना फिर से चालू होने के साथ ही पहले चरण में कुछ श्रमिकों को ही काम पर लगाया गया है। उन्होंने आगे बताया कि स्थानीयों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी मांगों को ध्यान में रखा जाएगा, लेकिन बार-बार के प्रदर्शन से प्रोजेक्ट संचालन में बाधा उत्पन्न हो रही है। अधिकारी ने यह भी कहा कि बीसीसीएल और ठेका कंपनी को बार-बार के अवरोधों से वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और व्यापक बनाएंगे। इस विरोध प्रदर्शन ने बीसीसीएल और ठेका कंपनी दोनों के समक्ष एक चुनौती खड़ी कर दी है। स्थानीय निवासियों का रोजगार का यह मुद्दा अब तूल पकड़ता जा रहा है और अगर इसका जल्द समाधान नहीं हुआ, तो इससे भविष्य में कोयला उत्पादन कार्य और भी प्रभावित हो सकता है।

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