

आसनसोल : आसनसोल, रानीगंज और दुर्गापुर सहित शिल्पांचल के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के अनुसार, दुर्गापुर और रानीगंज की वायु गुणवत्ता सबसे अधिक खराब हो चुकी है। विशेष रूप से दुर्गापुर ने प्रदूषण के मामले में राजधानी दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया है। 26 नवम्बर को दुर्गापुर का एक्यूआई 453 के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था, जिससे यह शहर प्रदूषण के मामले में दिल्ली से भी आगे निकल गया था। इसके अलावा रानीगंज का एक्यूआई भी पिछले कुछ दिनों से 260 से 300 के बीच बना हुआ है, जो अत्यधिक प्रदूषण का संकेत है। इससे स्पष्ट है कि आसनसोल, रानीगंज और दुर्गापुर समेत शिल्पांचल में वायु प्रदूषण एक खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है, जिससे यहां के निवासियों की सेहत पर गहरा असर पड़ रहा है।

राज्य सरकार इस बढ़ते प्रदूषण को लेकर अब गंभीर हो गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पश्चिम बर्दवान जिला प्रशासन ने इस समस्या को संज्ञान में लेते हुए तत्काल कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पश्चिम बर्दवान जिले के जिलाधिकारी एस. पोन्नाबलम ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की और अगले सप्ताह एक और महत्वपूर्ण बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। इस बैठक में आसनसोल, रानीगंज और दुर्गापुर के सभी कारखानों के प्रतिनिधियों, पुलिस और नगर निगम अधिकारियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कुछ कठोर कदम उठाए जाएंगे।

रानीगंज और दुर्गापुर में प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए एक आशंका यह जताई जा रही है कि कहीं यह क्षेत्र दिल्ली की तरह “गैस चैंबर” न बन जाए। पिछले कुछ दिनों में रानीगंज का एक्यूआई लगातार 200 से ऊपर बना हुआ है, और यह आंकड़ा अक्सर 300 तक पहुंच रहा है। यह वायु प्रदूषण का खतरनाक स्तर होने का प्रमाण है, जिससे यहां की हवा अत्यधिक अस्वास्थ्यकर हो चुकी है। आंकड़ों के अनुसार, जैसे-जैसे रात का समय बढ़ता है, रानीगंज में वायु प्रदूषण भी तेजी से बढ़ता है। आधी रात तक यहां का एक्यूआई 300 के आसपास पहुंच जाता है, जो सामान्य से कई गुना अधिक होता है।
दुर्गापुर में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। यहां भी प्रदूषण का स्तर अत्यधिक बढ़ चुका है और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति दीर्घकालिक प्रभावों का कारण बन सकती है। रानीगंज के विधायक तापस बनर्जी ने पश्चिम बर्दवान के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर तत्काल उपाय किए जाने की मांग की है, ताकि इस बढ़ते प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके।
इस बीच, उद्योगों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का ठीक से उपयोग न करने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेष रूप से स्पंज आयरन उद्योगों पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वे प्रदूषण रोधी यंत्रों का सही तरीके से प्रयोग नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण प्रदूषण में निरंतर वृद्धि हो रही है। यदि इन उद्योगों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया, तो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
प्रशासन का यह भी कहना है कि यदि इन कदमों को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है, तो प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, यह कार्य कठिन है, क्योंकि प्रदूषण के विभिन्न स्रोत हैं, जिनमें उद्योग, वाहनों का धुंआ और निर्माण कार्य शामिल हैं। इस बीच, जिला प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में कदम उठाने के लिए एक दीर्घकालिक योजना तैयार करने की आवश्यकता महसूस की है, ताकि इस संकट से निपटा जा सके और क्षेत्रवासियों को एक स्वस्थ वातावरण मिल सके।















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