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बंगाल में मतदाता सूची संशोधन पर गरमाई राजनीति, आयोग सख्त रुख में

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। चुनाव आयोग (ECI) ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और वरिष्ठ अधिकारियों को दिल्ली तलब किया है। दो दिनों तक चलने वाली इस अहम बैठक में मतदाता सूची में नामों की जांच, हटाने-जोड़ने की प्रक्रिया और संशोधन की पारदर्शिता पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि आयोग मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या राजनीतिक हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा।

पिछले कुछ दिनों से पश्चिम बंगाल में विपक्षी दलों की ओर से यह आरोप लगाया जा रहा था कि कई इलाकों में मतदाता सूची में नामों की गलत प्रविष्टियाँ हैं। वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि केंद्र सरकार बंगाल में SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ के लिए करना चाहती है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे “राजनीतिक एजेंडा” बताया है और कहा है कि “केंद्र बंगाल में मतदाताओं को डराने का प्रयास कर रहा है।”

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दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में यह स्पष्ट कहा था कि “SIR हर हाल में होगा और बंगाल में पारदर्शी मतदाता सूची बनाना आयोग की जिम्मेदारी है।” उनके इस बयान के बाद से ही राज्य में सियासी हलचल और तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने अब राज्य के CEO को दिल्ली बुलाकर मतदाता सूची से जुड़ी सभी रिपोर्ट मांगी है, जिससे यह साफ है कि आयोग इस बार किसी भी विवाद की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता।

ECI के सूत्रों के अनुसार, बैठक में यह भी समीक्षा की जाएगी कि किस प्रकार से 2002 की मतदाता सूची की तुलना मौजूदा लिस्ट से की जा रही है। आयोग ने हर जिले में “मैपिंग” का कार्य तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया है। इसके तहत यह देखा जा रहा है कि कौन से मतदाता अभी भी सूची में दो बार दर्ज हैं या जो अब उस क्षेत्र में निवास नहीं करते। इससे पहले बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, जिनमें से 18 लाख मृतक मतदाता, 26 लाख स्थानांतरित नागरिक और 7 लाख डुप्लिकेट पंजीकरण वाले पाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने तब आयोग को आदेश दिया था कि हटाए गए नामों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के मई माह तक होने हैं, और ECI फरवरी 2026 तक चुनावी कार्यक्रम घोषित करने की तैयारी में है। इसलिए आयोग इस वर्ष के अंत तक मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पूरी करना चाहता है। इसके लिए सभी जिलाधिकारियों और ब्लॉक स्तर पर BLO (Booth Level Officer) को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

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उधर, तृणमूल कांग्रेस की लीगल सेल ने घोषणा की है कि यदि किसी मतदाता का नाम SIR के दौरान अनुचित रूप से हटाया गया तो पार्टी उसे कानूनी सहायता प्रदान करेगी। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि “किसी भी नागरिक के मतदान अधिकार से समझौता नहीं होने दिया जाएगा।”

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस बार SIR के बहाने बंगाल में एक नई राजनीतिक जंग शुरू हो गई है। भाजपा इसे पारदर्शिता की दिशा में सुधार बता रही है, जबकि तृणमूल इसे केंद्र के “राजनीतिक हस्तक्षेप” के रूप में देख रही है। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि मतदाता सूची में सुधार का यह अभियान लोकतंत्र को और मजबूत करेगा या बंगाल की राजनीति में नया तूफ़ान खड़ा करेगा।

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