दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए मतदान में अब कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे समय दुर्गापुर शिल्पांचल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक विश्वनाथ पाड़ियाल के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। शनिवार को इस संभावित दल-बदल को लेकर सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों खेमों में हलचल तेज रही।
सूत्रों के अनुसार दुर्गापुर में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में विश्वनाथ पाड़ियाल औपचारिक रूप से भाजपा का दामन थाम सकते हैं। हालांकि देर शाम तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस खबर को लेकर चर्चाएं तेज रहीं।
विश्वनाथ पाड़ियाल दुर्गापुर क्षेत्र की राजनीति का बड़ा नाम माने जाते हैं। स्थानीय निकाय राजनीति से लेकर विधानसभा तक उनका प्रभाव रहा है। वह पांच बार पार्षद रह चुके हैं और वर्ष 2016 में दुर्गापुर पश्चिम विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहने के कारण उनकी अच्छी जनाधार वाली छवि मानी जाती है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ समय से तृणमूल कांग्रेस के भीतर विश्वनाथ पाड़ियाल की सक्रियता कम दिखाई दे रही थी। पार्टी संगठन में बदलते समीकरणों और नेतृत्व स्तर पर दूरी की चर्चाएं भी होती रही हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के दौरान पार्टी ने दुर्गापुर पश्चिम सीट से कवि दत्त को उम्मीदवार बनाया, जिसके बाद पाड़ियाल समर्थकों में नाराजगी की खबरें सामने आई थीं।
कहा जा रहा है कि टिकट नहीं मिलने और संगठन में कथित उपेक्षा के कारण उन्होंने नया राजनीतिक विकल्प तलाशने का निर्णय लिया। यदि वह भाजपा में शामिल होते हैं तो इसे चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले किसी प्रभावशाली स्थानीय नेता का दल बदलना केवल संख्या का मामला नहीं होता, बल्कि उसका मनोवैज्ञानिक असर भी पड़ता है। विश्वनाथ पाड़ियाल के साथ उनके समर्थकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का एक वर्ग भी नई पार्टी में जा सकता है, जिससे चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
दुर्गापुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र को इस बार महत्वपूर्ण सीट माना जा रहा है। यहां शहरी मतदाता, श्रमिक वर्ग, व्यापारिक समुदाय और पुराने राजनीतिक नेटवर्क का असर चुनाव परिणामों पर पड़ता है। ऐसे में विश्वनाथ पाड़ियाल जैसे अनुभवी नेता की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
भाजपा खेमे में इस संभावित शामिलीकरण को लेकर उत्साह का माहौल बताया जा रहा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत चेहरों के जुड़ने से संगठन को मजबूती मिलेगी और चुनावी मुकाबला और धारदार होगा।
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने इस मुद्दे पर संयमित प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि पार्टी संगठन मजबूत है और चुनाव विकास कार्यों के आधार पर लड़ा जा रहा है। कुछ नेताओं ने इसे विपक्ष की अफवाह करार दिया है।
शनिवार को दिनभर चली चर्चाओं ने दुर्गापुर की राजनीति को गर्माए रखा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विश्वनाथ पाड़ियाल वास्तव में भाजपा में शामिल होते हैं या नहीं। यदि ऐसा होता है तो मतदान से पहले दुर्गापुर पश्चिम सीट का मुकाबला और रोचक हो सकता है।
फिलहाल इस संभावित दलबदल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनावी मौसम में राजनीतिक समीकरण कभी भी बदल सकते हैं। आने वाले दिनों में दुर्गापुर शिल्पांचल की राजनीति और दिलचस्प होने के संकेत मिल रहे हैं।
















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