अज्ञात पीर की दरगाह में उमड़ी आस्था, दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु

Facebook
Twitter
WhatsApp

पुरुलिया/दिसरगढ़ :  पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से लगभग 250 किलोमीटर दूर पश्चिम बर्धमान और पुरुलिया जिलों की सीमा पर स्थित एक अनोखी दरगाह इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। घने जंगलों, नदी और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह धार्मिक स्थल ‘अज्ञात पीर बाबा’ की दरगाह के नाम से प्रसिद्ध है। शनिवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और मन्नतें मांगकर चादर चढ़ाई।

IMG 20240918 WA0025

यह दरगाह अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण भी विशेष मानी जाती है। नदी के बीच एक छोटे द्वीप पर स्थित इस स्थान तक पहुंचना आसान नहीं है। जलस्तर कम होने पर श्रद्धालु पैदल नदी पार कर यहां पहुंचते हैं, जबकि पानी अधिक होने पर नाव का सहारा लेना पड़ता है। कठिन रास्ते के बावजूद यहां आने वालों की आस्था कम नहीं होती।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह दरगाह पश्चिम बर्धमान के दिसेरगढ़ क्षेत्र में स्थित शेरशाह बाबा की प्रसिद्ध दरगाह से लगभग 500 मीटर की दूरी पर है। चारों ओर हरियाली और जंगलों से घिरा यह इलाका रहस्यमय वातावरण का अनुभव कराता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां पहुंचते ही मन को शांति मिलती है।

IMG 20260418 WA0099

दरगाह समिति के सदस्य चांद खान ने बताया कि यह स्थल लगभग 70 से 75 वर्ष पुराना माना जाता है। उनके अनुसार वर्षों पहले उनके पूर्वजों को इस द्वीप पर दो कब्रें मिली थीं। इन कब्रों की वास्तविक पहचान के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी, लेकिन स्थानीय लोगों ने इन्हें किसी महान पीर या वली की मजार मानकर पूजा-अर्चना शुरू कर दी।

पहचान स्पष्ट न होने के कारण इन कब्रों को ‘अज्ञात पीर बाबा’ कहा जाने लगा। समय के साथ यही नाम प्रसिद्ध हो गया और आज दूर-दूर से लोग इसी नाम से यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं।

बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और आसपास के अन्य क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां पहुंचे। कई लोगों ने परिवार की खुशहाली, रोजगार, स्वास्थ्य और संतान सुख की कामना की। कुछ लोग अपनी मन्नत पूरी होने के बाद धन्यवाद अर्पित करने भी आए थे।

IMG 20250511 WA0050

बिहार के जमुई जिले से पहुंचीं मीरा देवी ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से यहां आ रही हैं। उनके अनुसार जीवन में कठिन समय आने पर किसी परिचित ने उन्हें इस दरगाह के बारे में बताया था। यहां आने के बाद परिस्थितियां सुधरीं और तब से वह हर वर्ष दर्शन करने आती हैं।

इसी तरह जमुई की रेखा देवी ने कहा कि पारिवारिक परेशानियों के बीच उन्हें यहां आने से मानसिक शांति मिली। उन्होंने बताया कि कठिन दौर में इस दरगाह ने उन्हें नई उम्मीद दी। अब वह नियमित रूप से यहां आती हैं और चादर चढ़ाती हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि खास अवसरों और उर्स के दिनों में यहां भारी भीड़ उमड़ती है। प्रशासन और दरगाह समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है। जंगल और नदी के बीच स्थित होने के बावजूद यहां लोगों का उत्साह देखते ही बनता है।

अज्ञात पीर बाबा की यह दरगाह केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि विश्वास, उम्मीद और आस्था का प्रतीक बन चुकी है। कठिन रास्तों के बावजूद यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु यह संदेश देते हैं कि सच्ची श्रद्धा के सामने दूरी और बाधाएं कोई मायने नहीं रखतीं। शनिवार को उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर इस स्थान की लोकप्रियता साबित कर दी।

Leave a Comment

Leave a Comment

What does "money" mean to you?
  • Add your answer

Share Market

Also Read This

Gold & Silver Price

Our Visitor

0 3 6 3 1 4
Users Today : 9
Users Yesterday : 29