
पूर्व बर्दवान : दामोदर नदी के किनारे से मिली एक प्राचीन सूर्य मूर्ति ने इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के बीच उत्सुकता जगा दी है। इस महत्वपूर्ण खोज को बर्दवान विश्वविद्यालय के संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है, जहां विशेषज्ञ इसके ऐतिहासिक महत्व और कालखंड का निर्धारण करने में जुटे हुए हैं।
हरिपुर गांव के समीप दामोदर नदी के तट पर पिकनिक मना रहे कुछ युवकों की नजर इस मूर्ति पर पड़ी। सूचना मिलने पर बर्दवान विश्वविद्यालय के संग्रहालय के प्रभारी अधिकारी श्यामसुंदर बेरा घटनास्थल पर पहुंचे और मूर्ति का निरीक्षण किया। प्राथमिक जांच के बाद उन्होंने इसे पाल या सेन काल की मूर्ति होने का अनुमान जताया। पुलिस प्रशासन के सहयोग से मूर्ति को निकालकर विश्वविद्यालय के संग्रहालय में स्थानांतरित किया गया।

श्यामसुंदर बेरा ने बताया कि यह मूर्ति बेसाल्ट पत्थर से निर्मित है, जिसकी ऊंचाई लगभग तीन फीट और चौड़ाई डेढ़ फीट है। यह मूर्ति कला और शिल्प कौशल की उत्कृष्टता को दर्शाती है। यदि यह मूर्ति दसवीं या ग्यारहवीं शताब्दी की है, तो इसकी उम्र लगभग 1100 वर्षों की हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मूर्ति पाल या सेन राजवंश के समय में बनाई गई थी, जब इस क्षेत्र में वास्तुशिल्प और मूर्तिकला अपने चरम पर थी। सूर्य देवता की इस मूर्ति के मिलने से दक्षिण दामोदर क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर नई रोशनी पड़ी है।

स्थानीय निवासियों और इतिहास प्रेमियों के बीच इस खोज को लेकर उत्साह है। यह मूर्ति प्राचीन भारतीय सभ्यता और धार्मिक कला के समृद्ध इतिहास को समझने में एक नई कड़ी जोड़ सकती है। विश्वविद्यालय के अधिकारी मूर्ति के गहन अध्ययन और संरक्षण की प्रक्रिया में लगे हुए हैं।















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