
आसनसोल : भाजपा के वरिष्ठ नेता और आसनसोल के पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी ने पश्चिम बंगाल में हिंदी भाषी समुदाय के खिलाफ बढ़ते भेदभाव पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि कुछ समय से हिंदी भाषी बंगाली लोगों को अपमानजनक तरीके से ‘बीमारू’ कहकर संबोधित किया जा रहा है।
तिवारी ने इस प्रकार की टिप्पणियों को सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि यह भेदभावकारी मानसिकता राज्य में हिंदी भाषी और बंगाली समुदाय के बीच दरार पैदा करने की साजिश है। उन्होंने ऐसे लोगों को महान व्यक्तित्वों जैसे गुरु रवींद्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेने की सलाह दी। तिवारी ने कहा कि इन महापुरुषों के विचारों और उपदेशों ने हमेशा मानवता और एकता का संदेश दिया है, और उनकी शिक्षाओं से हर व्यक्ति अपने जीवन और सोच में सुधार कर सकता है।

तिवारी ने व्यंग्य करते हुए कहा कि जो लोग हिंदी भाषी समुदाय द्वारा आयोजित कार्यक्रमों, जैसे लिट्टी-चोखा पर सवाल उठाकर उन्हें ‘बीमारू’ कह रहे हैं, उन्हें खुद इस व्यंजन का स्वाद लेना चाहिए। उन्होंने कहा, “जो लोग हिंदी भाषियों को बीमारू कहते हैं, वे यदि चार लिट्टी खाकर अगले दिन तक स्वस्थ महसूस करते हैं, तो उन्हें समझ आ जाएगा कि हिंदी भाषी लोग बीमारू नहीं हैं। लेकिन यदि वे अस्वस्थ हो जाते हैं, तो उन्हें अपनी टिप्पणियों पर पुनर्विचार करना चाहिए और ऐसे अपमानजनक शब्दों का उपयोग बंद कर देना चाहिए।”

तिवारी ने स्पष्ट किया कि ऐसी टिप्पणियां केवल समाज को बांटने का काम करती हैं और इसका उद्देश्य तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की संस्कृति में विविधता और समन्वय की गहरी परंपरा रही है, और किसी भी असामाजिक तत्व को इस समरसता को तोड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
जितेंद्र तिवारी का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हिंदी भाषी समुदाय ने उनके इस प्रबल समर्थन के लिए उनकी सराहना की है। वहीं, बंगाल की राजनीति में यह मुद्दा नई बहस को जन्म दे रहा है।















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