
आसनसोल : पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले स्थित अयोध्या पहाड़, जो 1977 से 1980 के दशक तक व्यवसायी सुरेन जालान की कर्मभूमि रहा, आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। आसनसोल के प्रख्यात व्यवसायी सुरेन जालान ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने बताया कि आदिवासी वन कल्याण आश्रम द्वारा अयोध्या पहाड़ पर स्थापित राम मंदिर उनके कर्मस्थल का हिस्सा है और वहां पहुंचकर उन्हें गौरव और सौभाग्य की अनुभूति हुई।
उन्होंने कहा कि इस अवसर पर अपने उस दौर के कर्मचारियों को याद करने का अवसर मिला। उन्होंने कर्मचारियों के बीच कंबल वितरण किया और उनकी वर्तमान स्थिति को देखकर गहरा दुःख व्यक्त किया। सुरेन जालान ने कहा कि इतने लंबे समय के अंतराल के बाद भी क्षेत्र के मूलवासियों के जीवन में कोई ठोस बदलाव नहीं आया है।

सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि विकास और उत्थान की बातें केवल इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया तक सीमित हैं। वंचित इलाकों के वास्तविक हालात इससे कोसों अलग हैं। अयोध्या पहाड़ जैसे इलाकों में केवल पर्यटन स्थल विकसित किए जा रहे हैं, लेकिन वहां के मूल निवासियों के जीवन में सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “आज भी इन आदिवासियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है। सरकार की योजनाएं और वादे केवल कागजों और विज्ञापनों तक सीमित हैं। वंचितों का वास्तविक उत्थान तभी संभव है जब योजनाओं का क्रियान्वयन सही तरीके से हो।”
जालान ने आदिवासी वन कल्याण आश्रम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से मूलवासियों के बीच उम्मीद की किरण जागती है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह मूलवासियों के जीवनस्तर को सुधारने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए।















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