
आसनसोल : सरकारी खस जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप के जांच के दौरान विवाद ने तूल पकड़ लिया, जिसमें सलानपुर भूमि एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों को गंभीर धमकी दी गई। इस मामले में सलानपुर ब्लॉक के रूपनारायणपुर स्थित आछरा ग्राम पंचायत के चार निवासियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों में तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय अध्यक्ष एवं पंचायत सदस्य तपन तिवारी, उनके पुत्र पल्लव तिवारी, और दंपत्ति दोलन मंडल एवं कमल मंडल का नाम शामिल है।
आरोपों पर तपन तिवारी का पक्ष
तपन तिवारी ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वह गंभीर रूप से अस्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि भूमि विभाग के अधिकारी उनके क्षेत्र के निवासी दोलन मंडल से दुर्व्यवहार कर रहे थे। इसी के चलते दोलन और उनके पति कमल मंडल के अनुरोध पर वह घटनास्थल पर पहुंचे। तिवारी ने स्वीकार किया कि वहां बहस हुई, लेकिन धमकी देने का आरोप निराधार बताया। उन्होंने कहा, “मैं एक निर्वाचित सदस्य हूं, मुझे अपने क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में खड़ा होना चाहिए। घटना की जानकारी लेने के लिए मैं वहां गया था।”

भूमि विभाग का पक्ष
सलानपुर बीएलएलआरओ सुमन सरकार के अनुसार, 6 जनवरी को उनके अधिकारी सामडी रोड के निकट एक विवादित भूमि का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्हें घेर लिया गया और धमकी दी गई। आरोप है कि अधिकारियों को उनकी गाड़ी जलाने और शारीरिक हिंसा की धमकी दी गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि अधिकारी वहां से लौटने को मजबूर हो गए। बीएलएलआरओ ने बताया कि इस घटना की सूचना आसनसोल के एसडीओ, एडीएम (एलआर), सलानपुर बीडीओ समेत संबंधित अधिकारियों को दी गई।
अवैध कब्जे का मामला
मामला आछरा के कर्मतीर्थ के पास सामडी रोड से सटे एक भूमि का है, जिसे अवैध रूप से दीवार बनाकर घेरा गया है। आरोप है कि इस घेराबंदी में सरकारी खस जमीन का भी अतिक्रमण हुआ है। भूमि विभाग के अधिकारी इस अतिक्रमण की पुष्टि के लिए मौके पर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें भारी विरोध और धमकियों का सामना करना पड़ा।

पुलिस की कार्रवाई
7 जनवरी को इस मामले में चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने बताया कि आरोपियों में तपन तिवारी ने स्वयं अपना परिचय दिया, जबकि मौके पर मौजूद अन्य लोगों की पहचान नहीं हो पाई। पुलिस ने कानून के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।
तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया
तृणमूल नेतृत्व ने इस मामले पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन कब्जाने वालों को किसी भी सूरत में समर्थन नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी बार-बार जिलाधिकारियों को खस जमीन पर अवैध कब्जा रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है।
यह घटना सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा के सवालों को लेकर चर्चा का विषय बन गई है। अब देखना होगा कि मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है।















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